गणेश चतुर्थी यानी भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन गणेशजी का शिव पार्वती के पुत्र के रूप में प्राकट्य हुआ था। जब संसार को शिव के इस महातेजस्वी पुत्र के बारे में पता चला तो सभी ने भक्तिभाव से गणेशजी की स्तुति की। गणेशजी इससे बड़े प्रसन्न हुए और सभी को इच्छित फल पाने का वरदान दिया। गणेशजी की स्तुति नियमित किया जाए तो आर्थिक उलझन और कर्ज की परेशानी से भी मुक्ति पा सकते हैं।

ध्यान मंत्र

ओम सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम्।
ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम्।।

मूल-पाठ

सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजित: फल-सिद्धए।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।

त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चित:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।

इस आरती से करें गजानन जी की वंदना

हिरण्य-कश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चित:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।

महिषस्य वधे देव्या गण-नाथ: प्रपुजित:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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