जटा में गंगा माथे पे चंदा तन में भस्म रमाया है
गोरा संग केलाश विराजे अद्भुद तेरी माया है
जटा में गंगा माथे पे चंदा तन में भस्म रमाया है

मुझको भी हे नाथ बुलालो दर्शन दो के जिया जुडा,
जपु मैं ॐ नमः शिवाय शम्बू रहना सदा सहाए

बेल पत्र सा तीन नेत्र है तीनो लोक निहार रहे
भोले नाथ जी देदो साथ जी भक्त तुम्हारे पुकार रहे
सावन के जैसा ही मुझपर भगती का रस दो बरसा
जपु मैं ॐ नमः शिव्ये

महादेव हो महाकाल हो उमा पति अविनाशी
तुम्ही अधि हो तुम्ही अंत हो तुम्ही नाथ घट घट वासी
कुंदन पुनीत कुमार अमित का जीवन दो सफल बना
जपु मैं ॐ नमः शिव्ये

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply