जिस दिन देश अखंडित होगा
हवा बहेगी जब पुरवाई, उस दिन झुमके गाऊंगा मैं
उस दिन ख़ुशी मनाऊंगा मैं… जिस दिन देश अखंडित होगा

मन तो करता है मै गाऊं सावन ओर भादो के गीत
राधा गाऊं काना गाऊं और गाऊं अपना मनमीत
किन्तु माँ के खंडित बाजु मुजको बहुत रुलाते है
आँखों में रक्त उतर आता है अंगारे ढह जाते है
जिस दिन इन अंगारों से हर दिल आग लगाऊंगा मैं
उस दिन झुमके गाऊंगा मै उस दिन ख़ुशी मनाऊंगा मैं
जिस दिन देश अखंडित होगा

पास नहीं है वो ननकाना वो लवपुर लाहोर नहीं
हिंगलाज माता का मंदिर वो परसन की डोर नहीं
बरसों जिसने ज्ञान बिखेरा तक्षशिला भी हुआ पराया
हुई परायी धरती जिस पर नलवाने पौरुष चमकाया
जिस दिन सारे मानबिंदु ये लौटाकर ले आऊंगा मैं
उस दिन झुमके गाऊंगा मै उस दिन ख़ुशी मनाऊंगा मैं
जिस दिन देश अखंडित होगा

रावी का तट बार बार क्यु फिर आवाज लगाता है
बोल सके तो बोल जवाहर शपथ याद दिलाता है
मेरी लाश पर होंगे टुकडे बापू ये तेरी वाणी है
सत्य तुम्हारा हुआ रे झुठा और अहिंसा पानी
जिस दिन रावी अपनी होगी उस दिन ख़ुशी मनाऊंगा मैं
उस दिन झुमके गाऊंगा मै उस दिन ख़ुशी मनाऊंगा मैं
जिस दिन देश अखंडित होगा

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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