शनि एक गैस दानव के रूप में वर्गीकृत है क्योंकि बाह्य भाग मुख्य रूप से गैस का बना है और एक सतह का निःसन्देह अभाव है, यद्यपि इसका एक ठोस कोर होना चाहिए। ग्रह का घूर्णन इसके चपटे अंडाकार आकार धारण करने का कारण है, इस कारण, यह ध्रुवों पर चपटा और भूमध्यरेखा पर उभरा हुआ है। इसकी भूमध्यरेखीय और ध्रुवीय त्रिज्याओं के बीच करीब १०% का फर्क है – क्रमशः ६०,२६८ किमी बनाम ५४३६४ किमी। सौरमंडल में अन्य गैस दानव, बृहस्पति, यूरेनस और नेपच्यून भी चपटे हैं मगर कुछ हद तक। शनि सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है जो पानी से कम घना – लगभग ३०% कम है। यद्यपि शनि का कोर पानी से काफी घना है, गैसीय वातावरण के कारण ग्रह का औसत विशिष्ट घनत्व ०.६९ ग्राम/सेमी३ है। बृहस्पति पृथ्वी के द्रव्यमान का ३१८ गुना है जबकि शनि पृथ्वी के द्रव्यमान का ९५ गुना है, बृहस्पति और शनि एक-साथ सौरमंडल के कुल ग्रहीय द्रव्यमान का ९२% सहेजते है।

यहाँ शनि ग्रह के शांति के लिए १०८ नाम श्रीशनि अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् व नामावली दिया जा रहा है। इसके नित्य पाठ से शनि अनुकूलित होकर शुभ फल देता है।

|| श्रीशनि अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ||

शनि बीज मन्त्र – ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥

शनैश्चराय शान्ताय सर्वाभीष्टप्रदायिने ।

शरण्याय वरेण्याय सर्वेशाय नमो नमः ॥ १॥

सौम्याय सुरवन्द्याय सुरलोकविहारिणे ।

सुखासनोपविष्टाय सुन्दराय नमो नमः ॥ २॥

घनाय घनरूपाय घनाभरणधारिणे ।

घनसारविलेपाय खद्योताय नमो नमः ॥ ३॥

मन्दाय मन्दचेष्टाय महनीयगुणात्मने ।

मर्त्यपावनपादाय महेशाय नमो नमः ॥ ४॥

छायापुत्राय शर्वाय शरतूणीरधारिणे ।

चरस्थिरस्वभावाय चञ्चलाय नमो नमः ॥ ५॥

नीलवर्णाय नित्याय नीलाञ्जननिभाय च ।

नीलाम्बरविभूषाय निश्चलाय नमो नमः ॥ ६॥

वेद्याय विधिरूपाय विरोधाधारभूमये ।

भेदास्पदस्वभावाय वज्रदेहाय ते नमः ॥ ७॥

वैराग्यदाय वीराय वीतरोगभयाय च ।

विपत्परम्परेशाय विश्ववन्द्याय ते नमः ॥ ८॥

गृध्नवाहाय गूढाय कूर्मांगाय कुरूपिणे ।

कुत्सिताय गुणाढ्याय गोचराय नमो नमः ॥ ९॥

अविद्यामूलनाशाय विद्याऽविद्यास्वरूपिणे ।

आयुष्यकारणायाऽपदुद्धर्त्रे च नमो नमः ॥ १०॥

विष्णुभक्ताय वशिने विविधागमवेदिने ।

विधिस्तुत्याय वन्द्याय विरूपाक्षाय ते नमः ॥ ११॥

वरिष्ठाय गरिष्ठाय वज्रांकुशधराय च ।

वरदाभयहस्ताय वामनाय नमो नमः ॥ १२॥

ज्येष्ठापत्नीसमेताय श्रेष्ठाय मितभाषिणे ।

कष्टौघनाशकर्याय पुष्टिदाय नमो नमः ॥ १३॥

स्तुत्याय स्तोत्रगम्याय भक्तिवश्याय भानवे ।

भानुपुत्राय भव्याय पावनाय नमो नमः ॥ १४॥

धनुर्मण्डलसंस्थाय धनदाय धनुष्मते ।

तनुप्रकाशदेहाय तामसाय नमो नमः ॥ १५॥

अशेषजनवन्द्याय विशेषफलदायिने ।

वशीकृतजनेशाय पशूनाम्पतये नमः ॥ १६॥

खेचराय खगेशाय घननीलाम्बराय च ।

काठिन्यमानसायाऽर्यगणस्तुत्याय ते नमः ॥ १७॥

नीलच्छत्राय नित्याय निर्गुणाय गुणात्मने ।

निरामयाय निन्द्याय वन्दनीयाय ते नमः ॥ १८॥

धीराय दिव्यदेहाय दीनार्तिहरणाय च ।

दैन्यनाशकरायाऽर्यजनगण्याय ते नमः ॥ १९॥

क्रूराय क्रूरचेष्टाय कामक्रोधकराय च ।

कळत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमो नमः ॥ २०॥

परिपोषितभक्ताय परभीतिहराय ।

भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमो नमः ॥ २१॥

इत्थं शनैश्चरायेदं नांनामष्टोत्तरं शतम् ।

प्रत्यहं प्रजपन्मर्त्यो दीर्घमायुरवाप्नुयात् ॥

|| शनि अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ||

शनि अष्टोत्तरशतनामावली

शनि बीज मन्त्र –

ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ।

ॐ शनैश्चराय नमः । ॐ शान्ताय नमः । ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ।

ॐ शरण्याय नमः । ॐ वरेण्याय नमः । ॐ सर्वेशाय नमः ।

ॐ सौम्याय नमः । ॐ सुरवन्द्याय नमः । ॐ सुरलोकविहारिणे नमः ।

ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः । ॐ सुन्दराय नमः । ॐ घनाय नमः ।

ॐ घनरूपाय नमः । ॐ घनाभरणधारिणे नमः । ॐ घनसारविलेपाय नमः ।

ॐ खद्योताय नमः । ॐ मन्दाय नमः । ॐ मन्दचेष्टाय नमः ।

ॐ महनीयगुणात्मने नमः । ॐ मर्त्यपावनपदाय नमः ।

ॐ महेशाय नमः । ॐ छायापुत्राय नमः । ॐ शर्वाय नमः ।

ॐ शततूणीरधारिणे नमः । ॐ चरस्थिरस्वभावाय नमः ।

ॐ अचञ्चलाय नमः । ॐ नीलवर्णाय नमः । ॐ नित्याय नमः ।

ॐ नीलाञ्जननिभाय नमः । ॐ नीलाम्बरविभूशणाय नमः ।

ॐ निश्चलाय नमः । ॐ वेद्याय नमः । ॐ विधिरूपाय नमः ।

ॐ विरोधाधारभूमये नमः । ॐ भेदास्पदस्वभावाय नमः ।

ॐ वज्रदेहाय नमः । ॐ वैराग्यदाय नमः । ॐ वीराय नमः ।

ॐ वीतरोगभयाय नमः । ॐ विपत्परम्परेशाय नमः ।

ॐ विश्ववन्द्याय नमः । ॐ गृध्नवाहाय नमः । ॐ गूढाय नमः ।

ॐ कूर्माङ्गाय नमः । ॐ कुरूपिणे नमः । ॐ कुत्सिताय नमः ।

ॐ गुणाढ्याय नमः । ॐ गोचराय नमः ।

ॐ अविद्यामूलनाशाय नमः । ॐ विद्याविद्यास्वरूपिणे नमः ।

ॐ आयुष्यकारणाय नमः । ॐ आपदुद्धर्त्रे नमः ।

ॐ विष्णुभक्ताय नमः । ॐ वशिने नमः ।

ॐ विविधागमवेदिने नमः । ॐ विधिस्तुत्याय नमः ।

ॐ वन्द्याय नमः । ॐ विरूपाक्षाय नमः । ॐ वरिष्ठाय नमः ।

ॐ गरिष्ठाय नमः । ॐ वज्राङ्कुशधराय नमः ।

ॐ वरदाभयहस्ताय नमः । ॐ वामनाय नमः ।

ॐ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः । ॐ श्रेष्ठाय नमः ।

ॐ मितभाषिणे नमः । ॐ कष्टौघनाशकर्त्रे नमः । ॐ पुष्टिदाय नमः ।

ॐ स्तुत्याय नमः । ॐ स्तोत्रगम्याय नमः । ॐ भक्तिवश्याय नमः ।

ॐ भानवे नमः । ॐ भानुपुत्राय नमः । ॐ भव्याय नमः ।

ॐ पावनाय नमः । ॐ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः ।

ॐ धनदाय नमः । ॐ धनुष्मते नमः । ॐ तनुप्रकाशदेहाय नमः ।

ॐ तामसाय नमः । ॐ अशेषजनवन्द्याय नमः ।

ॐ विशेशफलदायिने नमः । ॐ वशीकृतजनेशाय नमः ।

ॐ पशूनां पतये नमः । ॐ खेचराय नमः । ॐ खगेशाय नमः ।

ॐ घननीलाम्बराय नमः । ॐ काठिन्यमानसाय नमः ।

ॐ आर्यगणस्तुत्याय नमः । ॐ नीलच्छत्राय नमः ।

ॐ नित्याय नमः । ॐ निर्गुणाय नमः । ॐ गुणात्मने नमः ।

ॐ निरामयाय नमः । ॐ निन्द्याय नमः । ॐ वन्दनीयाय नमः ।

ॐ धीराय नमः । ॐ दिव्यदेहाय नमः । ॐ दीनार्तिहरणाय नमः ।

ॐ दैन्यनाशकराय नमः । ॐ आर्यजनगण्याय नमः । ॐ क्रूराय नमः ।

ॐ क्रूरचेष्टाय नमः । ॐ कामक्रोधकराय नमः ।

ॐ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः । ॐ परिपोषितभक्ताय नमः ।

ॐ परभीतिहराय नमः । ॐ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः ।

॥ इति शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णम् ॥

शनि अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् व नामावली समाप्त ॥

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply