शीतली प्राणायाम की विधि, फायदे और सावधानियां Sheetli Pranayam Steps,Benefits And Precautions In Hindi

0

शीतली प्राणायाम करने की विधि क्या है ,और इस प्राणायाम को करने से कौन से फायदे मिलते हैं ।शीतली प्राणायाम करते वक्त हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए । कौन सी सावधानियां होती हैं। आइए सबसे पहले जानते हैं, कि

शीतली प्राणायाम क्या है I Sheetli Pranayam In Hindi

शीतली प्राणायाम शरीर के ताप को कम करता है ।पूरे शरीर में ठंडक पहुंचाता है।शरीर के साथ-साथ मन को शांत करता है। मस्तिष्क को शांत करता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है शीतली अर्थात शीतलता प्रदान करना इस प्राणायाम को करने से संपूर्ण शरीर, मन ,मस्तिष्क में शीतलता आती है। यह प्राणायाम शीतकारी प्राणायाम के समान लाभ प्रदान करता है। अब आइए जानते हैं

 शीतली प्राणायाम करने की विधि | Sheetli Pranayam Steps In Hindi

1-इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप पद्मासन या किसी भी आरामदायक आसन में बैठ जाएं।

2-अपनी आंखों को बंद करके अपने हाथों को ज्ञान मुद्रा में रखते हुए घुटनों पर रखें।

3-अपनी जीभ के दोनों किनारों को मोड़कर नली का आकार बना ले।

4-नली नुमा जीभ के सहारे धीरे-धीरे श्वास को अंदर खींचे।

5-स्वास को पेट के अंदर भर कर मुंह बंद कर ले।

6-अब अपने जबड़े को छाती से सटाकर रखें (जालंधर बंध) लगाकर रखें।

7-जालंधर बंध के साथ जितनी देर तक श्वास को रोककर रख सकते हैं ,उतनी देर तक रखें।

8-जालंधर बंध को खोलते हुए अर्थात अपने जबड़े को छाती से ऊपर उठाते हुए स्वास को नासिका से धीरे-धीरे बाहर निकाले।

9-इस तरह आपका एक चक्र पूरा हुआ।

10-पहले कुछ दिनों तक इसे 10-15 बार तक करें। फिर इसे लगभग आधा घंटा तक कर सकते हैं।

अब आइए जानते हैं

शीतली प्राणायाम के फायदे | Sheetli Pranayam Benefits In Hindi

वैसे तो शीतली प्राणायाम के बहुत से फायदे, लेकिन कुछ फायदे विशेष हैं जिनके बारे में जानकारी दी जा रही है।

1-इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है।

2-इस प्राणायाम के अभ्यास से चिंता कम होती है। जो लोग अधिक चिंतित रहते हैं, उनके लिए यह अच्छा प्राणायाम है।

3-जो लोग डिप्रेशन के शिकार हैं उन लोगों को यह प्राणायाम जरूर करना चाहिए ।क्योंकि डिप्रेशन को दूर करने के लिए यह रामबाण प्राणायाम है।

4-जिन लोगों को गुस्सा अधिक लगती है, या क्रोध के शिकार हैं। जरा जरा सी बात पर क्रोध करते हैं । वे लोग यदि इस प्राणायाम का अभ्यास करते हैं ,तो गुस्सा काफी हद तक कम हो जाता है।

5-इस प्राणायाम के अभ्यास से भूख और प्यास नियंत्रित होती है।

6-इस प्राणायाम के अभ्यास से शरीर में शीतलता आती है। इसलिए इसका अभ्यास करने से रक्तचाप कम हो जाता है।

7-शरीर में गर्मी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों को कम करता है जिससे पित्त नियंत्रित होता है।

8-यह प्राणायाम जननांगों में हारमोंस को नियंत्रित करता है।

9-इसके अभ्यास से वासना का मानसिक और शारीरिक दोनों तरह का प्रभाव कम हो जाता है।

10-इस प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करने वालों पर जहर का प्रभाव कम हो जाता है।

11-जिस तरह से सांप अपने केचुली को बदल देता है और उसके शरीर पर दूसरी त्वचा आ जाती है। इसी तरह से यह प्राणायाम त्वचा को बदलने की क्षमता रखता है।

12-इस प्राणायाम के अभ्यास से पाचन तंत्र मजबूत होता है व पाचन से संबंधित बीमारियों में लाभ मिलता है।

13-इस प्राणायाम के अभ्यास से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

14-इसके अभ्यास से रक्त शुद्ध होता है।

15-इस प्राणायाम के अभ्यास से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से फिट रहता है।

अब आइए जानते हैं इस प्राणायाम को करते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

शीतली प्राणायाम की सावधानियां |  Sheetli Pranayam Precautions In Hindi

1-इस प्राणायाम का अभ्यास सर्दियों के मौसम में नहीं करना चाहिए।

2-जिन व्यक्तियों को खांसी या टॉन्सिल्स की बीमारी है उन लोगों को भी यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए ,क्योंकि यह ठंडक को बढ़ावा देता है शरीर में शीतलता लाता है।

3-लो ब्लड प्रेशर आज उनका रक्तचाप  कम रहता है। उन लोगों को इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

4-यदि काफी दिन से कब्ज की समस्या है तो भी इस प्राणायाम को करने से बचना चाहिए।

5-जिन लोगों को हृदय रोग है उनको प्राणायाम करते वक्त श्वास को अंदर नहीं रोकना चाहिए।

शीतली प्राणायाम के बाद करने वाले आसन।

शीतली प्राणायाम करने के बाद सवासन करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *