अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् |
देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि|| 7/23

व्याख्या : इसमें कोई संदेह नहीं कि कम बुद्धि वालों को मिलने वाला फल नष्ट हो जाएगा। मनचाहे फल के लिए मनचाहे देवताओं को पूजने वालों को देवता मिल जाएंगे। लेकिन मेरे भक्त ऐसे किसी फेर में नहीं फंसते और मुझको ही प्राप्त होते हैं।

जो भी अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए सुख-सुविधाओं के साधन देवताओं से मांगते हैं। उन्हें मनचाहा फल पूजे जाने वाले देवता दे देते हैं। लेकिन यह फल हमेशा के लिए नहीं होता। क्योंकि संसार की सभी सुख-सुविधाओं के साधन अपने आप में ही नाशवान हैं। इसलिए जो लोग नष्ट हो जाने वाले फल को देवताओं से मांगते हैं उन्हें अल्प बुद्धि ही कहा जा सकता है।

भगवान कह रहे हैं कि जो लोग फल की इच्छा में देवताओं को पूजते हैं वह उन देवताओं को प्राप्त होते हैं। मतलब उस देवता रूपी एनर्जी को प्राप्त होकर फिर जन्म लेकर संसार में आ जाते हैं। लेकिन जो भक्त किसी देवता को नहीं बल्कि मुझ निराकार परमात्मा को भजते हैं वह भक्त आखिर में मुझ निराकार परमात्मा को प्राप्त हो जाते हैं।

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शालू सिंह

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