युग परिवर्तन की बेला में , हम सब मिलकर साथ चलें

देश धर्म की रक्षा के हित , सहते सब आधार चलें

मिलकर साथ चलें , मिलकर साथ चले। ।

शौर्य पराक्रम की गाथाएं , भरी पड़ी है इतिहासों में

परंपरा के चिर उन्नायक , जिए निरंतर संघर्षों में

हृदयों में उस राष्ट्रप्रेम के , लेकर हम तूफान चले

मिलकर साथ चलें , मिलकर साथ चलें। ।

कलयुग में संगठन शक्ति ही , जागृति का आधार बनेगी

एक सूत्र में पीरो सभी को , सपने सब साकार करेगी

संस्कृति के पावन मूल्यों की , लेकर हम सौगात चलें

मिलकर साथ चलें , मिलकर साथ चलें

ऊंच-नीच का भेद मिटाकर , समृद्ध जीवन को सरसायें

फैलाकर आलोक ज्ञान का , परा शक्तियों को प्रकटाएं

निविड़ निशा की काट कालीमा , लाने नवल प्रभात चलें

मिलकर साथ चलें , मिलकर साथ चलें

अडिग हमारी निष्ठा उर में , लक्ष्य प्राप्ति की तड़पन मन में

तन मन धन सब अर्पण करने , संघ मार्ग के दुष्कर रण में

केशव के सास्वत विचार को , ध्येय मान दिन रात चले

मिलकर साथ चलें , मिलकर साथ चलें

मिलकर साथ चलें , मिलकर साथ चलें। ।

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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One thought on “Yug parivartan ki bela me युग परिवर्तन की बेला में”

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