यदि आप भी आञ्जनेय नंदन हनुमान जी के भक्त हैं तो नित्य-क्रिया से निवृत होकर संध्या वंदन के समय या हनुमान पूजन के समय आञ्जनेय गायत्री , ध्यानम् , त्रिकाल वंदनं करें-

|| आञ्जनेय गायत्री , ध्यानम् , त्रिकाल वंदनं ||

अथ ध्यानम्

उद्यदादित्य संकाशं उदार भुज विक्रमम् ।
कन्दर्प कोटि लावण्यं सर्व विद्या विशारदम् ॥

श्री राम हृदयानंदं भक्त कल्प महीरुहम् ।
अभयं वरदं दोर्भ्यां कलये मारुतात्मजम् ॥

अञ्जनानन्दनं वीरं जानकी शोकनाशनम् ।
कपीशं अक्षहन्तारं वन्दे लंका भयंकरम् ॥

आञ्जनेयं अतिपाटलाननं कञनाद्रि कमनीय विग्रहम् ।
पारिजात तरुमूल वासिनं भावयामि पवमान नन्दनम् ॥

उल्लंघ्य सिन्धोः सलिलं सलीलं यस्शोक वह्निं जनकात्मजाय ।
आदाय तेनैव ददाह लंकां नमामि तं प्रान्जलिराञ्जनेयं ॥

अतुलित बलधामं स्वर्ण शैलाभदेहम्

दनुजवन कृशानं ज्ञानिनां अग्रगण्यम् ।

सकल गुण निधानं वानराणां अधीशम्

रघुपति प्रिय भक्तं वात जातं नमामि ॥

गोश्पदीकृत वारशिं मशकीकृत राक्षसाम् ।

रामायण महामाला रत्नं वन्दे अनिलात्मजम् ॥

यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं तत्र तत्र कृत मस्तकाञ्जलिम् ।

भाश्पवारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम् ॥

अमिषीकृत मार्तंदं गोश्पदीकृत सागरम् ।

तृणीकृत दशग्रीवं आञ्जनेयं नमाम्यहम् ॥

मनोजवं मारुत तुल्य वेगं

जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।

वातात्मजं वानर यूथ मुख्यं

श्री रामदूतं शिरसा नमामि ॥

आञ्जनेय गायत्री , ध्यानम् , त्रिकाल वंदनं

अथ आञ्जनेय गायत्री
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि ।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ॥

आञ्जनेय गायत्री , ध्यानम् , त्रिकाल वंदनं

आञ्जनेय त्रिकाल वंदनं

प्रातः वंदनं
प्रातः स्मरामि हनुमन् अनन्तवीर्यं
श्री रामचन्द्र चरणाम्बुज चंचरीकम् ।
लंकापुरीदहन नन्दितदेववृन्दं
सर्वार्थसिद्धिसदनं प्रथितप्रभावम् ॥

दोपहर वंदनं
माध्यम् नमामि वृजिनार्णव तारणैकाधारं
शरण्य मुदितानुपम प्रभावम् ।
सीताधि सिंधु परिशोषण कर्म दक्षं
वंदारु कल्पतरुं अव्ययं आञ्ज्नेयम् ॥

सायं वंदनं
सायं भजामि शरणोप स्मृताखिलार्ति
पुञ्ज प्रणाशन विधौ प्रथित प्रतापम् ।
अक्षांतकं सकल राक्षस वंश
धूम केतुं प्रमोदित विदेह सुतं दयालुम् ॥

इति: आञ्जनेय गायत्री , ध्यानम् , त्रिकाल वंदनं॥

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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