शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगत: शाश्वते मते |
एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुन: ।। गीता 8/26।।

अर्थ: प्रकाश और अंधकार जगत में ये दो मार्ग शाश्वत है! प्रकाश (आत्म जागृति) से जाकर लौटना नहीं पड़ता, जबकि अंधकार (देहाध्यास) से जाकर लौटना पड़ता है!

व्याख्या: मनुष्य जीवन में दो ही मार्ग होते हैं एक मोह-माया में फंसकर संसार सागर का और दूसरा अपने स्वरूप को जानने के लिए परमार्थ का। संसार सागर अधोगति है और परमार्थ ऊर्ध्वगति है। अधोगति में बार-बार जन्म-मरण होता रहता है और ऊर्ध्वगति में जन्म-मरण के चक्र से छुटकारा मिल जाता है। मोह-माया में फंसे व्यक्ति की अधोगति होती है इसको अंधकार वाला मार्ग भी कहा जाता है।

ऐसे परमात्मा के भक्ति-भाव में लीन मनुष्य की ऊर्ध्वगति होती है, जिसको प्रकाश वाला मार्ग कहा जाता है, इसमें साधक आत्मा का प्रकाश अपने भीतर अनुभव करने लगता है। फिर जब व्यक्ति की ऊर्ध्वगति में मृत्यु होती है, तब मुक्त हो जाता है और संसार में लौटकर नहीं आता। लेकिन जिनकी अधोगति में मृत्यु होती है, वह दोबारा जन्म लेकर इस धरती पर लौट आते हैं।

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शालू सिंह

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