वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन। भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन।। 7/26

हे अर्जुन! मैं भूतकाल की हर घटना को जानता हूं जो अतीत में हो चुकी है, वर्तमान में स्थित है और भविष्य में होने वाली है, किंतु मुझे कोई नहीं जानता।

परमात्मा से पूरी सृष्टि का निर्माण हुआ है, इसलिए पूरे ब्रह्माण्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो ईश्वर से अछूता हो। ईश्वर पहले घट चुकी हर घटना में समान रूप से विद्यमान है। इस श्लोक में भगवान कह रहे हैं कि आज तक जो भी घटा है, मैं उस सबको अच्छी तरह से जानता हूं।

सिर्फ उनको ही नहीं जानता, बल्कि जो वर्तमान में स्थित हैं, उन बातों को भी जानता हूं। साथ ही जो भविष्य में होंगे, उन सभी बातों को भी मैं जानने वाला हूं। हे अर्जुन! मैं तो सबको जानता हूं लेकिन मुझ परमात्मा को कोई नहीं जानता।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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