पट खोल मेरे बाबा वो ओ डमरू वाले ओ डमरू वाले

भगत जनों की भीड़ लगी है दर्श की दर पे आस जगी है
हाल घड़ी अन्मोल अन्मोल मेरे बाबा
डमरू वाले ओ डमरू वाले
तू शिव शंकर महावरधानी दूजा नही कोई तेरा सानी
आसन से तू डोल अब डोल मेरे बाबा
डमरू वाले ओ डमरू वाले
भूल भगत की मन में धरियों करके दया सब संकट हरियो
भक्तो को मत तोल मत तोल मेरे बाबा
डमरू वाले ओ डमरू वाले

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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