प्रचीन ॠषियों ने वेदों में से आम व्यक्ति के भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति हेतु विभिन्न सूक्तों को छाँट कर या अलग करके पुराणों में एवं शास्त्रों में लिखा। जैसे रूद्र सूक्त,गोसुक्त,वरुण सूक्त आदि। हनुमानजी से संबन्धित ग्रन्थों में हनुमानजी की पूजन व प्रसन्नार्थ जो सूक्त लिखा गया श्रीहनुमत्सूक्तम् कहलाता है।

अथ श्रीहनुमत्सूक्तम्

श्रीमन्तो सर्वलक्षणसम्पन्नो जयप्रदः

सर्वाभरणभूषित उदारो महोन्नतोष्ट्रारूढः

केसरीप्रियनन्न्दनो वायुतनूजो यथेच्छं पम्पातीरविहारी

गन्धमादनसञ्चारी हेमप्राकाराञ्चितकनककदलीवनान्तरनिवासी

परमात्मा वनेचरशापविमोचनो

हेमकनकवर्णो नानारत्नखचिताममूल्यां मेखलां च स्वर्णोपवीतं

कौशेयवस्त्रं च बिभ्राणः सनातनो परमपुरषो

महाबलो अप्रमेयप्रतापशाली रजितवर्णः

शुद्धस्पटिकसङ्काशः पञ्चवदनः

पञ्चदशनेत्रस्सकलदिव्यास्त्रधारी

श्रीसुवर्चलारमणो महेन्द्राद्यष्टदिक्पालक-

त्रयस्त्रिंशद्गीर्वाणमुनिगणगन्धर्वयक्षकिन्नरपन्नगासुरपूजित

पादपद्मयुगलः नानावर्णः कामरूपः

कामचारी योगिध्येयः श्रीहनुमान्

आञ्जनेयः विराट्रूपी विश्वात्मा विश्वरूपः

पवननन्दनः पार्वतीपुत्रः

ईश्वरतनूजः सकलमनोरथान्नो ददातु।

इदं श्रीहनुमत्सूक्तं यो धीमानेकवारं पठेद्यदि

सर्वेभ्यः पापेभ्यो विमुक्तो भूयात् ।

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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