यान्ति देवव्रता देवान् पितृन्यान्ति पितृव्रताः।
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्।। गीता 9/25।।

अर्थ: देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं, भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मेरा पूजन करने वाले मुझको ही प्राप्त होते हैं।

व्याख्या: हम जो भाव पक्का करते हैं, वही मन में तैरने लगता है और हम उसी के अनुसार हो जाते हैं। भगवान कह हैं कि इस जन्म में जो देवताओं के पूजन में लगे रहते हैं तथा दिन रात उनके बारे में ही विचारते हैं, मरने के बाद वो देवताओं को प्राप्त हो जाते हैं। ऐसे ही जो पितरों का पूजन करते हैं और उनके बारे में ही सोचते रहते हैं।

वो मरने के बाद वो पितर बन जाते हैं और जो इस जन्म में भूतों के पूजन में लगे रहते हैं और केवल भूतों के बारे में सोचते रहते हैं वो मृत्यु के उपरांत भूतों को ही प्राप्त हो जाते हैं, लेकिन जो इस जन्म में मुझ परमात्मा का पूजन करते हैं और मेरे ही भाव में बने रहते हैं वो मरने के बाद मुझे ही प्राप्त हो जाते हैं।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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